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मैसेजिंग एप व्हाट्सएप की जासूसी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। व्हाट्सएप ने ख़ुद इस
बात की पुष्टि की है कि भारत के कुछ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप
चैट की जासूसी हुई है। व्हाट्सएप ने इसकी जानकारी अमेरिकी कोर्ट में दी है। मुकदमें
में दी गई जानकारी के मुताबिक़ एक इज़रायली फर्म ने एक स्पाइवेयर (जासूसी वाले सॉफ़्टवेयर)
के ज़रिए भारतीय यूज़र्स की जासूसी की है।
वहीं भारत सरकार के
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस संबंध में व्हाट्सएप से जानकारी
माँगी है। अभी तक सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक़ जिन लोगों के व्हाट्सएप की कथित हैकिंग
या कथित जासूसी हुई है उनमें मुख्य रूप से मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और पत्रकार हैं, जो आदिवासियों और
दलितों के लिए अदालत में सरकार से लड़ रहे थे या उनकी बात कर रहे थे।
अभी तक सामने आईं रिपोर्ट्स
के मुताबिक़ भारत के 10 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी जासूसी
हुई है। यह बात उन्होंने व्हाट्सएप के हवाले से कही है। जिन लोगों की कथित जासूसी हुई
है उनमें बेला भाटिया, भीमा कोरेगांव केस के वकील निहाल सिंह राठौड़, जगदलपुर लीगल एड ग्रुप की शालिनी गेरा, दलित एक्टिविस्ट डिग्री
प्रसाद चौहान, आनंद तेलतुम्बडे, शुभ्रांशु चौधरी, दिल्ली के आशीष गुप्ता, दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर सरोज गिरी, पत्रकार सिद्धांत सिब्बल और राजीव शर्मा के नाम भी शामिल हैं।
जासूसी के लिए किस
सॉफ़्टवेयर का हुआ इस्तेमाल?
इज़रायल की कंपनी एनएसओ
ग्रुप (NSO) पर इस हैकिंग का आरोप लगा है। ख़बर है कि कंपनी ने इसके लिए Pegasus नाम के स्पाईवेयर
(सॉफ़्टवेयर) का इस्तेमाल किया है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो पिगासस सॉफ़्टवेयर के
ज़रिए दुनियाभर के क़रीब 1,400 लोगों को शिकार बनाया गया है। बता दें कि पिगासस सॉफ़्टवेयर
साल 2016 में उस समय चर्चा में आया था जब एंटी वायरस सॉफ़्टवेयर और सिक्योरिटी फर्म
kaspersky ने अपने ब्लॉग पोस्ट में कहा था कि पिगासस एक बहुत ही बड़ा जासूसी सॉफ़्टवेयर
है और इसकी मदद से आईफ़ोन-आईपैड से लेकर किसी भी एंड्रॉयड फ़ोन को हैक किया जा सकता
है।
इस सॉफ़्टवेयर के ज़रिए
किसी भी फ़ोन पर 24 घंटे नज़र रखी जा सकती है। ख़ास बात यह है यूज़र्स को इसकी भनक
भी नहीं लगती कि उसके फ़ोन में कोई जासूसी एप या सॉफ़्टवेयर है। पिगासस सॉफ़्टवेयर
के ज़रिए किसी भी फ़ोन को पूरी तरह से कब्ज़े में लिया जा सकता है।
मध्यप्रदेश हनीट्रैप
में भी पिगासस के ज़रिए ही अफसर-नेताओं के फ़ोन टैप करवाए गए थे
जिस पिगासस सॉफ़्टवेयर
का कथित इस्तेमाल व्हाट्सएप जासूसी करने में हुआ है उसी सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल मध्य
प्रदेश के चर्चित हनीट्रैप कांड में हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक़ बंगलूरू की एक कंपनी
नेताओं और अफ़सर के फ़ोन टैपिंग के लिए पिगासस (Pegasus) सॉफ़्टवेयर का इस्तेमाल करती थी। यह सॉफ़्टवेयर फ़ोन में छिपकर
कॉल रिकॉर्डिंग, वॉट्सएप चैटिंग, एसएमएस के साथ अन्य चीज़ों की सर्विलांस आसानी से कर सकता है।
Pegasus सॉफ़्टवेयर को आपके
फ़ोन में ऐसे इंस्टॉल करवाते हैं हैकर्स
Pegasus
अटैक में हैकर्स यूज़र्स के मोबाइल नंबर पर एक टेक्स्ट मैसेज
भेजते हैं जिसमें एक वेब लिंक भी होता है। इस लिंक पर क्लिक करते ही आपके फ़ोन की जासूसी
शुरू हो जाती है। मैसेज के साथ आए लिंक पर क्लिक करने पर एक वेब पेज खुलता है लेकिन
तुरंत बंद हो जाता है। इसके बाद हैकर्स आपकी इसी ग़लती का फ़ायदा उठाकर आपके फ़ोन में
जेलब्रेक (सिक्योरिटी तोड़ने वाला वायरस) डालते हैं।
इसके साथ कई अन्य मैलवेयर
भी आपके फ़ोन में चुपके से इंस्टॉल किए जाते हैं। इसके बाद इस सॉफ़्टवेयर के ज़रिए
आपके नंबर पर हो रही बातचीत से लेकर, मैसेज, ई-मेल, पासवर्ड, वेब हिस्ट्री और सोशल मीडिया एप्स पर होने वाली हर एक चैटिंग और गतिविधि पर नज़र
रखी जाती है।
गौर करने वाली बात
यह है कि पिगासस सॉफ़्टवेयर व्हाट्सएप मैसेज को भी पढ़ सकता है, जबकि व्हाट्सएप मैसेज
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड होता है। वहीं पिगासस सॉफ़्टवेयर को तैयार करने वाली कंपनी
एनएसओ ग्रुप ने अपनी सफाई में कहा था कि इस सॉफ़्टवेयर के ज़रिए डाटा इकट्ठा करके वह
केवल आतंकवाद या आपराधिक जाँच करने के लिए ज़िम्मेदार सरकारों को ही बेचती है।


